हृदयाघात और पक्षाघात का कारण बन सकता है उच्च रक्तचाप- डा. बी के सिंह

हृदयाघात और पक्षाघात का कारण बन सकता है उच्च रक्तचाप- डा. बी के सिंह

 

हृदयाघात और पक्षाघात का कारण बन सकता है उच्च रक्तचाप- डा. बी के सिंह

कैसरगंज (बहराइच) उच्च रक्तचाप जिंदगी के लिए घातक है इससे न सिर्फ हृदय, मस्तिष्क, और गुर्दे पर बुरा प्रभाव पड़ता है बल्कि हृदयाघात और पक्षाघात की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। धूम्रपान और मद्यपान करने वाले लोगों को तो उच्च रक्तचाप होता ही है ऑफिस या घर में तनाव के चलते भी व्यक्ति उच्च रक्तचाप से पीड़ित हो सकता है। दवाइयां तो उपलब्ध है लेकिन तनाव मुक्त जिंदगी और परहेज ही उच्च रक्तचाप से बचाव का बेहतर उपाय है।
क्षेत्र में बढ़ रहे उच्च रक्तचाप के मरीजों की संख्या के बाबत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चेस्ट फीजिशियन डॉ बीके के सिंह ने बातचीत के दौरान बताया कि अधिकतर हृदय रोग का मूल कारण उच्च रक्तचाप, धूम्रपान, मद्यपान व मधुमेह है ।उच्च रक्त चाप का दुष्प्रभाव ह्रदय, मस्तिष्क दोनों गुर्दों एवं आंखों पर विशेष रूप से होता है ।यदि उच्च रक्तचाप के साथ रोगी मधुमेह से भी ग्रसित हो तो स्थिति और जटिल हो जाती है। उन्होंने बताया कि 120/ 80 एम0एच0जी से अधिक किंतु 140/ 90 एम0 एच0 जी0 से कम रक्तचाप वाले व्यक्ति प्री हाइपरटेंन्सिव कहलाते हैं। 140/ 90 एमएमएचजी से कम रक्तचाप वाले ग्रेड प्रथम व 160/110 एम0एम0 एच0 जी0 से कम रक्तचाप वाले रोगी ग्रेड-3 गंभीर रोगी की श्रेणी में आते हैं।
डॉ बीके सिंह ने बताया कि असहज कार्य करने पर भी रक्तचाप बढ़ जाता है ।इसलिए इसे कार्यालय हाइपरटेंशन के नाम से जाना जाता है। डॉ सिंह ने बताया कि उच्च रक्तचाप महाधमनी या रीनल आर्टरी में अवरोध गुर्दे की बीमारी, गुर्दे में ट्यूमर, आदि बीमारियों के कारण भी होता है।
उन्होंने बताया कि कई बार की जांच में यदि रक्तचाप बढ़ा रहे तभी उस व्यक्ति को उच्च रक्तचाप की श्रेणी में मानते हैं। उच्च रक्तचाप की जांच दोनों हाथों से स्पष्ट न होने पर पैर से करनी चाहिए ।उन्होंने बताया कि बढ़ा हुआ रक्तचाप गर्भावस्था और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए प्राण घातक हो सकता है। डॉ सिंह ने बताया कि उच्च रक्तचाप से बचाव के लिए सबसे महत्वपूर्ण है उस जीवन शैली का परित्याग जिसके कारण यह स्थिति आती है। इसके अलावा सिगरेट, शराब, तंबाकू व अन्य नशीली चीजों का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। तथा कम से कम 6 से 8 घंटे भरपूर सोना चाहिए। इस बीमारी में वजन को बढ़ने नहीं देना चाहिए। इसके लिए घी, मलाई, तली हुई खाद एवम् मिठाई आदि का सेवन बिलकुल नहीं करना चाहिए।
डॉ सिंह ने बताया कि उच्च रक्तचाप के रोगी को नियमित प्रातः भ्रमण व्यायाम व योग अभ्यास करने के अलावा खाने में नमक की मात्रा का सेवन भी कम कर देना चाहिए। क्रोध चिंता एवं शोक नहीं करना चाहिए तथा नियमित अनुलोम विलोम करने से इस रोग को नियंत्रित किया जा सकता है।
डॉ सिंह ने बताया कि औषधियों का प्रयोग हमेशा चिकित्सक से परामर्श के बाद ही करना चाहिए।

*बीमारी के लक्षण*

1-कमजोरी महसूस करना
2- बात-बात में क्रोध आना
3-आंखों की रोशनी कम होना

*बचाव के उपाय*

1- नमक का सेवन न करना
2- नशे से परहेज
3- योगाभ्यास
4- भरपूर नींद
5- वजन कम करना आदि

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